क्यूँ लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
आँखें बंद हो जाती है
धड़कन मेरी बढ जाती है
एक बेचैनी सी होती है
क्यों लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
क्यों मुझको इतना तद्पाते हो
यह मीठा मीठा दर्द कहा से लाते हो
कोण हो तुम क्यूँ नहीं बतलाते हो
मैं परियों देश से आया हूँ
चाँद पर जाकर रहता हूँ
इन लम्बी लम्बी साँसों से तुमको बतलाने आया हूँ
तुम परियों की रानी हो
मैं तुमको लेने आया हूँ
बाहों में मेरी आ जाओ
आकार मुझ में मिल जाओ
इन साँसों को तुम बंद करो
क्यों लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
मुझ पर कुछ तो रहम करो
न जाने ऐसा क्या कर देते हो
क्यूँ मुझको इतना मदहोश कर देते हो
पागल से हो जाती हूँ
जब लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
चेहरे पर नकाब लगा चूका हूँ मैं राजनीति में उतर चूका हूँ मैं झूठ,मक्कारी,आश्वासन जैसे हथियार साथ ले चला हूँ मैं देश का राजनेता बन चूका हूँ मैं किस कुर्सी पर बैठना है यह हुनर सीख चूका हूँ मैं संसद में हंगामा कर रहा हूँ मैं कैसे उसको चलने नहीं देना यह सीख चूका हूँ मैं आई.ए.एस ,पी.सी .एस को फटकार रहा हूँ मैं लाल बत्ती लगाकर मंत्री बन गया हूँ मैं अनपढ होकर देश चला रहा हूँ मैं हर पांच सालो में पचास साल पीछे देश धकेल रहा हूँ मैं चेहरे पर नकाब लगा चूका हूँ मैं देश का राजनेता बन चूका हूँ मैं
आँखों में आयी नििदया रानी लेके सपनो का एक बगीचा बगीचे बैठी हुई है परियों की रानी बनाकर चंदा का पालना, सुलाया मेरे बेटे को बनाकर तारों की डोरी ,झुलाया है मेरे बेटे को रोने लगा तो चांदनी के आँचल से ढककर दूध पिलाया परियों के रानी ने आँखों में आयी नििदया रानी सो जा मेरे बेटे सो जा मेरे बेटे
दोड़ पड़ता हूँ दरख्तों को हिलते हुए देख के शायद मेरा महबूब इनके करीब से गुजरा होगा दरख्तों की हवा में आज नमी सी जान पड़ती है शायद कुछ वक़्त ठहर कर वो रोया होगा हर शाख के पत्ते पर बूँद सी िदखाई देती है मिट्टी में कहीं गुम ना हो जाए भीगी पलकों से निकले मोती सोचकर हर दरख्त ने अपनी शाख को झुकाया होगा