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Friday, May 8, 2020

पत्थर

कांटे भी लगेंगे छाले भी पड़ेंगे इन पैरों में
वक़्त लगेगा इस दर्द से निकलने में
सब्र रखना अपनी मोहब्बत में
वक़्त लगता  है पत्थरों को पिघलने में

Tuesday, April 14, 2020

लॉक डाउन

वो सब फ़नाह हो गए
जो बीवी की तस्वीर पर्स में लेकर घूमते थे
और हर बार पर्स निकालने पर
चूमते थे
आज बर्तन मांज रहे हैं
जानू  के एक इशारे पर
-अंजान

Saturday, December 28, 2019

मोहब्बत

मोहब्बत की बात करते करते
न जाने कब देबदास बन गए
आंखों में बसे थे तुम ख्वाब बनकर
न जाने कब तुम मेरे रब बन गए

Monday, November 13, 2017

मैं तो दर्द की बात कर रहा था
ना जाने लोग कहाँ से मोहब्बत ले आये
खूब चिल्लाये मेरी गली में आकर
वो मर्द के सारे बच्चे


दरार

दरार न पड़े रिश्तो में
इसलिए  मचाते आता हूँ 
वर्ण मुझे भी नज़रे बचाकर 
दबे पांव घर में घुसना आता है
                             अंजान 
                                       एक स्पर्श 
तन्हा  हैं अगर
तो घर में जले लगे रहने दीजिये 
मुस्कराने की वजह मिल जाएगी 
घर आवाद रहे तो 
                             अंजान 
                                       एक स्पर्श 

Sunday, February 26, 2017

चेहरा

मजे मजे में पी ली थी एक बार
चेहरा नज़र आ गया था  हर एक शक्श का

Monday, January 23, 2017

रोशनी

गुलिस्तां काँटों से इतना भर गया है कि
मोहब्बत का हिसाब मांगने लगे हैं लोग
रोशनी से इस कदर डरने लगें हैं कि
अँधेरे में भी मुँह छुपा के निकलने लगे हैं लोग

Friday, January 6, 2017

आश


बांह फैलाये खड़ा हूँ
जैसी ही मिलेगी मोहब्बत
उसे भींच लूंगा
पल भर में उसे अपने अंदर
खींच लूंगा...

Monday, October 3, 2016

पतझर

 पतझर में नंगे हो गए थे जो पेड़
सूख कर गिर गए बारिश के इंतज़ार में

शमायें

ना जाने कितनी शमायें जल उठी 
परवाने देखकर
इन्हे भी तड़पा तड़पा कर
जान लेने में मज़ा आता है

Friday, September 2, 2016

आवाज़

मोहब्बत तो खामोशियों से भरी होती है
आवाज़ तो उसमें बस दिल टूटने की होती है

Thursday, September 1, 2016

गुफ्तगू

फिर तन्हाइयों में जीना चाहता हूँ,
ऐ जिंदगी तेरा क्या इरादा है।
आ गुफ्तगू कर ले,
इन खामोश दीवारों से किनारा कर ले।
मोहब्बत में क्या क्या कर गुजरे,
उनका हिसाब कर ले,
कितना तनहा रोया,कितना उनके आँचल में।
आ खुले आसमां के नीचे,
मोहब्बत और तन्हाई को साथ ले चले।
किसका पल्ला भारी है ,
पूछेंगे उनसे बारी बारी

Wednesday, March 11, 2015

बड़े लोग

दरियाओं को देखा है बनते खारा, समुन्दर में मिलकर
डर लगता है बड़े लोगो के शहर में आकर

इंतज़ार

हर रोज़ खिड़की पर आकर 
न जाने क्या ख्वाब बुन रही थी आँखें 
किसी में इंतज़ार में 
अरसा बीत गया पत्थर हो गयी आँखें
उसके इंतज़ार में 
घर के सामने वाली सड़क भी बिखर गयी
एक मुसाफिर के इंतज़ार में

दर्द

हंसा हंसा के तुमने तो बुरा हाल कर दिया 
सच बताओ, कितने छुपा रखे हैं दामन में दर्द भरे किस्से 

Monday, January 5, 2015

साँसे

जिस्म में मेरे  कहीं तो तेरी साँसे चलती है
वरना किसी की यादो में  दम नहीं की हमको  रुला सके 

Thursday, August 21, 2014

हिसाब

मांगती है साक़ी जब हिसाब पिलाने का
सोचते है नहीं कोई फायदा होश गबाने का

Thursday, January 30, 2014

क्या लिखूं मैं

और क्या लिखूं मैं तेरे बिछड़ने पर 
बस ये एक दिल है जो मुझसे अब संभलता नहीं

जुदाई

हर वक़्त दिल को यकीं दिलाता रहता हूँ कि तुम मेरे पास हो 
नादां है दिल एक पल कि जुदाई सह  पाता नहीं