Wednesday, June 27, 2012

क्या दीवारों को कभी चीखते हुए देखा है
खामोश  होकर बंद कमरे में बैठ कर तो देखिये

क्या रास्तो तो कभी चलते हुए देखा है
किसी की तलाश में घर से निकल कर तो देखिये

क्या अँधेरे को कभी डरते हुए देखा है
एक चिंगारी जला कर तो देखिये

क्या उदासी को कभी सहमते हुए देखा है
होंठो पर तबस्सुम ला कर तो देखिये

क्या खामोश निगाहों में सैलाब आते हुए देखा है
बिछड़े हुए को कभी मिला कर तो देखिये

Tuesday, April 24, 2012

romantic साँसे

क्यूँ लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
आँखें बंद हो जाती है
धड़कन मेरी बढ जाती है
एक बेचैनी सी होती है
क्यों लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
क्यों मुझको इतना तद्पाते हो
यह मीठा मीठा दर्द कहा से लाते हो
कोण हो तुम क्यूँ नहीं बतलाते हो
मैं परियों देश से आया हूँ
चाँद पर जाकर रहता हूँ
इन लम्बी लम्बी साँसों से तुमको बतलाने आया हूँ
तुम परियों की रानी हो
मैं तुमको लेने आया हूँ
बाहों में मेरी आ जाओ
आकार मुझ में मिल जाओ
इन  साँसों को तुम बंद करो
क्यों लम्बी लम्बी साँसे भरते हो
मुझ पर कुछ तो रहम करो
न जाने ऐसा क्या कर देते हो
क्यूँ मुझको इतना मदहोश कर देते हो
पागल से हो जाती हूँ
जब लम्बी लम्बी साँसे भरते हो

Monday, March 26, 2012

राजनेता (भ्रस्टाचार)

चेहरे पर नकाब लगा चूका हूँ मैं
राजनीति में उतर चूका हूँ मैं
झूठ,मक्कारी,आश्वासन जैसे हथियार साथ ले चला हूँ मैं
देश का राजनेता बन चूका हूँ मैं
किस कुर्सी पर बैठना है
यह हुनर सीख चूका हूँ मैं
संसद में हंगामा कर रहा हूँ मैं
कैसे उसको चलने नहीं देना यह सीख चूका हूँ मैं
आई.ए.एस ,पी.सी .एस को फटकार रहा हूँ मैं
लाल बत्ती लगाकर मंत्री बन गया हूँ मैं
अनपढ होकर देश चला रहा हूँ मैं
हर पांच सालो में पचास साल पीछे देश धकेल रहा हूँ मैं
चेहरे पर नकाब लगा चूका हूँ मैं
देश का राजनेता बन चूका हूँ मैं

लोरी

आँखों में आयी नििदया रानी
लेके सपनो का एक बगीचा
बगीचे बैठी हुई है परियों की रानी
बनाकर चंदा का पालना, सुलाया मेरे बेटे को
बनाकर तारों की डोरी ,झुलाया है मेरे बेटे को
रोने लगा तो चांदनी के आँचल से ढककर
दूध पिलाया परियों के रानी ने
आँखों में आयी नििदया रानी
सो जा मेरे बेटे सो जा मेरे बेटे

Friday, December 2, 2011

अहसास


दोड़ पड़ता हूँ दरख्तों को हिलते हुए देख के
शायद मेरा महबूब इनके करीब से गुजरा होगा
दरख्तों की हवा में आज नमी सी जान पड़ती है
शायद कुछ वक़्त ठहर कर वो रोया होगा
हर शाख के पत्ते पर बूँद सी िदखाई देती है
मिट्टी में कहीं गुम ना हो जाए भीगी पलकों से निकले मोती
सोचकर हर दरख्त ने अपनी शाख को झुकाया होगा

Thursday, March 17, 2011

फूटपाथ

किसी और का गुस्सा उत्तरते देखा हैं
फूटपाथ पर उस गरीब को पिटते देखा है

सिसकियों में दर्द को छुपाते देखा है
फूटपाथ पर रोते उस गरीब को देखा है

पेट के लिए बचपन खोते देखा है
फूटपाथ पर सोते नन्ने हाथों की लकीरों को िमटते देखा है

बूढे माँ बाप के लिए खुद को बेचते देखा है
फूटपाथ पर लड़की की अस्मत को लूटते देखा है

कब तक यह सिलसिला चलेगा किसने देखा है
फूटपाथ पर हर चुनाब पर नेताओं को आश्वासन देते देखा है

Wednesday, March 9, 2011

देखी है लोगो में तेरे हुस्न की तलब


देखी है लोगो में तेरे हुस्न की तलब
शहर में आते ही रुख, तेरी गली की तरफ होगा

डरता हूँ होश आने पर क्या होगा
तेरे शहर का वीरान मैकदा चहक रहा होगा

हर कोई साकी से कह रहा होगा
कितनी रहम दिल है तू जरूर तेरे सीने में कभी दर्द रहा होगा

तू ही बता मेरे मर्ज़ का इलाज़ क्या होगा
क्योंकि सुबह होते ही फिर रुख उसकी गली की तरफ होगा

हर शाम जख्म लेके तेरे पास लौटते हैं
लेकिन कब तक तेरे आँचल में सर रख कर रोना होगा

भूल जा अंजान साकी का रहम ,उस गली का भ्रम
तोड़ दे ये सीलसीला हर जख्म,दर्द को वक्त से भरना होगा

Tuesday, March 8, 2011

देख के आज मुझको शहर में

देख के आज मुझको शहर में
तेरे पैर के निचे से खिसकी जमीं सी क्यों है

नहीं रोते हो होके मुझसे जुदा
फिर तेरे शहर कि हवा मे नमी सी क्यों है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
बरसो बाद भी यहाँ यादें थमी सी क्यों हैं

हर याद को समेट के फिर ले जाऊंगा
न जाने बरसो बाद भी दिल को तेरी कमी सी क्यों है

Wednesday, February 23, 2011

याद

याद
यादों से तेरी कैसे लडेंगे
तुम ही कहो दूर तुम से कैसे रहेंगे
बंद आँखों से भी तुझे ही देखू
खोलू जो आँखें, न पा के तुझको
लोगो से पूछू
अभी अभी यहाँ महबूब था मेरा
मुझको बता दो कहा चला गया
बहुत सताती है यादें तेरी
यादो से कहता हूँ तुम हो बस मेरी
दिल कहता है यादो से इतना न मुझको सताओ
महबूब के साथ बीताया हर लम्हा मेरा वापस ले आओ
कितना तडपता हूँ कुछ तो तरस खाओ
मुझको जल्दी महबूब से मिलाओ .

Friday, January 7, 2011

शिकायत


गम है कोई तो मुझसे आकर शिकवा तो कर
य़ू छुप के आँशु तो न वहा

चुभ रहा क्या दिल में मुझसे आकर मश्बरा तो कर
य़ू चुप रह कर तो न सता

बहा रही हो क्यों आँशु मुझसे आकर दिल की बात तो कर
यू बंद पलकों के पीछे दर्द तो न छुपा

मेरी हर खता के लिए मुझसे आकर झगड़ा तो कर
य़ू पास रहकर दूरी का अहसास तो न करा