Sunday, February 7, 2010

यही कही पर


कल कल जो करती है नदियाँ,
लगता है तू हंसती है यही कही पर
महकी है जो हवाएं
लगता है तू साँसे ले रही है यही कही पर
सनसन जो करते है पत्ते
लगता है तेरी पायल झनकी है यही कही पर


दौड़ जाता हूँ मैं सुनकर नदिया की कलकल
महकी हवाओं से आये मुझे याद तेरी हरपाल
सुन कर पत्तो की सनसन में ढूँढू तुझको हर जगह पर
पर तू मुझको कही नज़र न आये ज़मी पर


सोचता हूँ कही यह सपना तो नहीं था
शायद तेरा अहसास तो कही था
वरना मैं पागलो की तरह न भागतादिन रात तेरी याद में न जागता

Friday, February 5, 2010

जाते हो तो जाओ


जाते हो तो जाओ
खुश रहना
पर मुझे इतना याद तो न आओ

देखते थे जब भी तुमको हम
आँखें रहते थे मलते
देखा था शायद पहली बार
ज़मी पर किसी परी को चलते

जाते हो तो जाओ
खुश रहना
पर मुझे इतना याद तो न आओ

देखेते थे चाँद को जब भी
उसको चिडाया करते थे
तुझसे हसी है मेरा महबूब
कहकर उसको इतराया करते थे

जाते हो तो जाओ
खुश रहना
पर मुझे इतना याद तो न आओ

जुल्फों का तेरे चहरे पर पर्दा
देखा है हमने जुल्फों के झरोके से
तेरा पलके झुकाकर शरमाना
हमसे नज़रें चुराना

जाते हो तो जाओ
खुश रहना
पर मुझे इतना याद तो न आओ

दिल रोज़ पहुँच जाता है
गली के उस मोड़ पर
जहाँ तू गयी है
अपनी यादें छोड़ कर

जाते हो तो जाओ
खुश रहना
पर मुझे इतना याद तो न आओ

Monday, January 25, 2010

चाहत



तेरी चाहत को छुपाने लगा हूं


न जाने क्यूँ लोगो से नज़रें चुराने लगा हूं


तेरी हर बात को भुलाने लगा हूँ


न जाने कब तेरा जिक्र झिड जाए


मैं तुझको बदनाम होने से बचाने लगा हूँ




Sunday, January 24, 2010

यादें







दिन रात में तुमसे बातें करता हूं
सच कहता हूँ पर होश में नहीं रहता हूँ
दिल दिमाग और धड़कन में तुम समाई हो
हरपल ख्यालों में खोया रहता हूँ
फिर न जाने क्यों में होश में नहीं रहता हूँ

डरता हूँ अब तुमसे से बातें करने में
कुछ ऐसा न हो जाए जो तुम को चुभ जाए
बस इसी उल्फत में रहता हूँ
क्योंकि तुमसे जब बातें करता हूँ
होश में मैं नहीं रहता हूँ

शायद में रोक नहीं पाता खुद को
इतनी मोहब्बत करता हूँ
प्यार में तेरे बहक कर कुछ ऐसा न कह जाओ
इस उलझन में रहता हूँ
क्योंकि तुमसे जब बातें करता हूँ
होश में मैं नहीं रहता हूं


जब में अकेले रहता था
अक्सर तन्हाईओं में रहता था
जब से तुमसे मिला हूं
तेरे बारे में सोच सोच के तन्हाईओं से लड़ लेता हूं
लेकिन कही में रो न दूं इस बात से डरता हूं
क्योंकि तुमसे जब बातें करता हूँ
होश में मैं नहीं रहता हूँ


न जाने मैं तुमसे कितनी मोहब्बत करता हूं
दिन रात में तुमसे बातें करता हूं
सच कहता हूँ पर होश में नहीं रहता हूँ

न जाने में तुमसे कितनी मोहब्बत करता हूं
दिन रात में तुमसे बातें करता हूं
सच कहता हूँ पर होश में नहीं रहता हूँ


आज जो हद से गुजर गये


कल खुद को नहीं रोक पायेंगे


और एक बार जो शर्म का पर्दा हट गया


कल फिर तुझसे नजरें नहीं मिला पायेंगे







इजहारे मोहब्बत नहीं कर पाते वोह तो क्या हुआ
उनकी आँखें ही काफी है काफिला बुलाने को

तुमने आँखों से प्यार सिखाया
वरना हम कब के मिट गए होते
अपना तो रिश्ता गमो से था
मिलने का शौक तो तुमने जगाया

तुम्हारी आवाज़ से ही सुकून मिलता हैं
वरना मेरा जहाँ तो दर्द में डूबा था
वरसो का इंतज़ार आज खत्म हुआ
वरना हम तो कब से साहिल पर अकेले बैठे थे

Wednesday, November 25, 2009

कुछ और वक्त ठहर जाते


अभी उनसे मिल के आया था

फ़िर मिलने को दिल मचल उठा है

कुछ और वक्त ठहर जाते ऐ जालिम

कहते कहते अश्क झलक उठा है




वीरान था यह दिल

तुमने फ़िर से रंग भर दिया है

मेरी जिंदगी का हर पल

तेरी यादों से फ़िर महक उठा है



सोचता था कभी

तनहा न रह जाऊ

लेकिन तुमने जिंदगी में आके

महफ़िल में जाना सिखा दिया है



आंखे बंद कर ली है मैंने
अब तो बस इंतज़ार है तेरे आने का

कुछ और वक्त रुक जाते ऐ जालिम

कहते कहते अश्क झलक उठा है

Sunday, November 22, 2009

ख़ामोशी



में तेरी गली से


खामोश गुजर जाऊंगा


बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


ख्वाब में जो तू आएगी


चुप चाप में तुझको देखूंगा


नींद न टूट जाए कही


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


जो तू मिल जाए अकेले में


इधर उधर हो जाऊंगा


सर्फ़िरा न समझ ले तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा

जिस रोज़ देखेगी तू


कुछ वक्त ठहर जाऊंगा


आंशुओं से सब कह जाऊंगा


पर बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊँगा