Sunday, November 22, 2009

ख़ामोशी



में तेरी गली से


खामोश गुजर जाऊंगा


बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


ख्वाब में जो तू आएगी


चुप चाप में तुझको देखूंगा


नींद न टूट जाए कही


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


जो तू मिल जाए अकेले में


इधर उधर हो जाऊंगा


सर्फ़िरा न समझ ले तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा

जिस रोज़ देखेगी तू


कुछ वक्त ठहर जाऊंगा


आंशुओं से सब कह जाऊंगा


पर बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊँगा






1 comment:

संजय भास्कर said...

गणतंत्र दिवस की बधाईया, जय हिंद