Monday, January 25, 2010

चाहत



तेरी चाहत को छुपाने लगा हूं


न जाने क्यूँ लोगो से नज़रें चुराने लगा हूं


तेरी हर बात को भुलाने लगा हूँ


न जाने कब तेरा जिक्र झिड जाए


मैं तुझको बदनाम होने से बचाने लगा हूँ




2 comments:

संजय भास्कर said...

अच्छा लिखा है ......

संजय भास्कर said...

गणतंत्र दिवस की बधाईया, जय हिंद