
आज जो हद से गुजर गये
कल खुद को नहीं रोक पायेंगे
और एक बार जो शर्म का पर्दा हट गया
कल फिर तुझसे नजरें नहीं मिला पायेंगे


में तेरी गली से
खामोश गुजर जाऊंगा
बदनाम न हो जाए तू
इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा
ख्वाब में जो तू आएगी
चुप चाप में तुझको देखूंगा
नींद न टूट जाए कही
इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा
जो तू मिल जाए अकेले में
इधर उधर हो जाऊंगा
सर्फ़िरा न समझ ले तू
इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा
जिस रोज़ देखेगी तू
कुछ वक्त ठहर जाऊंगा
आंशुओं से सब कह जाऊंगा
पर बदनाम न हो जाए तू
इस डर से आवाज़ न लगाऊँगा

