Sunday, January 24, 2010


आज जो हद से गुजर गये


कल खुद को नहीं रोक पायेंगे


और एक बार जो शर्म का पर्दा हट गया


कल फिर तुझसे नजरें नहीं मिला पायेंगे







इजहारे मोहब्बत नहीं कर पाते वोह तो क्या हुआ
उनकी आँखें ही काफी है काफिला बुलाने को

तुमने आँखों से प्यार सिखाया
वरना हम कब के मिट गए होते
अपना तो रिश्ता गमो से था
मिलने का शौक तो तुमने जगाया

तुम्हारी आवाज़ से ही सुकून मिलता हैं
वरना मेरा जहाँ तो दर्द में डूबा था
वरसो का इंतज़ार आज खत्म हुआ
वरना हम तो कब से साहिल पर अकेले बैठे थे

Wednesday, November 25, 2009

कुछ और वक्त ठहर जाते


अभी उनसे मिल के आया था

फ़िर मिलने को दिल मचल उठा है

कुछ और वक्त ठहर जाते ऐ जालिम

कहते कहते अश्क झलक उठा है




वीरान था यह दिल

तुमने फ़िर से रंग भर दिया है

मेरी जिंदगी का हर पल

तेरी यादों से फ़िर महक उठा है



सोचता था कभी

तनहा न रह जाऊ

लेकिन तुमने जिंदगी में आके

महफ़िल में जाना सिखा दिया है



आंखे बंद कर ली है मैंने
अब तो बस इंतज़ार है तेरे आने का

कुछ और वक्त रुक जाते ऐ जालिम

कहते कहते अश्क झलक उठा है

Sunday, November 22, 2009

ख़ामोशी



में तेरी गली से


खामोश गुजर जाऊंगा


बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


ख्वाब में जो तू आएगी


चुप चाप में तुझको देखूंगा


नींद न टूट जाए कही


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा


जो तू मिल जाए अकेले में


इधर उधर हो जाऊंगा


सर्फ़िरा न समझ ले तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊंगा

जिस रोज़ देखेगी तू


कुछ वक्त ठहर जाऊंगा


आंशुओं से सब कह जाऊंगा


पर बदनाम न हो जाए तू


इस डर से आवाज़ न लगाऊँगा






Wednesday, October 21, 2009

तू वीर है


बजुओ में जब बल है

किस्मत को क्यों कोसता है

हाथो की लकीरों को क्यो देखता है

कमजोर नही तू वीर है तू वीर है


तूफानों को चीरकर

मुसीबतों को पीछे छोड़ के

आगे निकल तू भीड़ से

कमजोर नही तू वीर है तू वीर है


हिम्मत दे जाए जवाब

लगे टूटता सा सपना

हौसला मत खोना अपना

कमजोर नही तू वीर है तू वीर है

आंख तेरी भर आएगी

सामने मंजिल जब पायेगा

तब तू सब से कह पायेगा

कमजोर नही में वीर हूँ में वीर हूँ

Sunday, October 11, 2009

बात जब की हैं

बूंदों ने था तुझको भिगोया
रोम रोम था तेरा खोया
बात जब की है
आंखों ने की थी शरारत
अदायों में थी हरारत
बात जब की है
पास था मैंने तुझको बुलाया
पलकों को था तुने झुकाया
बात जब की है
कुछ कहते कहते होठ चुप हो गए
ना जाने किस शर्म हया में तुम छुप गए थे
बात जब की है
आज फिर वोह मौसम आया है
जो ना में कह पाया था
बात जब की है
ना तुम कह पाये थे
क्या तुमने दिल में छुपाया था
बात जब की है
जब भी हम तनहा थे
आज भी तनहा है
सच आज भी है


Thursday, October 8, 2009

आंसू




बदनाम तो हम पहले भी थे


पर इतने न थे


तुमने जो इल्जाम लगाये


उसमे मिले गम भी कम न थे






साहिल पर बैठकर देखा था


रेत पर लिखे नामो को मिटते हुए


आज जो देखा मिटते हुए अपना नाम


आंखों से निकले आंसू भी कम न थे




बेवफा हम को कहके


आप ख़ुद को बचा गए


आज अकेले है हम लेकिन


दाग तेरे दमन में भी कम न थे




Wednesday, July 29, 2009

रिसेसन



बाबा मेरा कल्याण नही हो रहा
घर वालो का भरण पोषण नही हो रहा है
बाबा सब्र कर हाथ दिखा
यह क्या भाग्य रेखा की जगह ,
रिसेसन की रेखा
जैसे ही देखा
बाबा ने सोचा दक्षिणा नही दे पायेगा
लेकिन बिना लिए भगा दिया ,
मेरा धंधा रिसेसन का शिकार हो जाएगा
सोचकर बाबा बोला
चल यह घड़ी उतार दे
लेकिन बाबा,
लेकिन परन्तु कुछ नही
उतार दे तेरा समय तो वैसे ही ख़राब चल रहा है
अब अपनी समस्या बता
क्या तेरे साथ है घटा
बाबा जब से फायर हुआ हूँ
जी मचल रहा है
मचलेगा क्यों नही
चैटिंग जो नही कर पा रहा है
नौकरी से ज्यादा कन्या का मिलन तड़पा रहा है
नही बाबा नौकरी का रास्ता दिखाऊ
बाबा बेवकूफ मेरी जगह किसी
एचआर की कन्या को हाथ दिखाओ
चैन अंगूठी बेचके उसके ऊपर खरचा कर आओ
यहाँ से जल्दी भाग जाओ
तथास्तु तथास्तु तथास्तु !