Sunday, February 17, 2013

प्यार का जवाब

चलो मैंने कसम खा ली तेरे प्यार की
अब ला तारे आसमान से तोड़ के

अगर मेरा चेहरा चाँद में नज़र आता है
फिर क्यों मेरे घर रोज़ चला आता है

कसमे पूरी नहीं कर पाया तो मैं बेवफा हो गयी
क्यूँ नहीं किया था प्यार तूने संभल के

बहुत शराब पी ली तूने मेरी आँखों से
चल जा अब पैसे खर्च कर मैखाने में

और अगर मैं रहती हूँ हर वक़्त तेरे ख्वाओं में
तो क्या करेगा पाकर मुझे हकीकत में

Wednesday, January 30, 2013

मोहब्बत

सोचा न  जिनको ना जाने कैसे ख्यालो में  आ गए  
दूर से देखा था बस न जाने कैसे उनके  इतने करीब  आ गया 

तेरी ही तलाश में रहती हैं हर वक्त आँखें 
न जाने इन कदमो का रुख कब तेरी गली की तरफ हो गया 

सुना था अभी तक मोहब्बत काला  जादू करती है 
एक धुआं सा उठा और मैं मोहब्बत की गिरफ्त में आ गया 

अभी तक तनहा था , पर जिंदगी में गम न था अंजान 
फिर यह अचानक दिल में दर्द कहाँ से आ गया 

Monday, December 3, 2012

याद

बहुत याद करता हूँ मै तुमको कैसे कहूं
डर लगता है कही तुम रो न पड़ो

तुम क्या गए शहर छोड़कर


तुम क्या गए  शहर छोड़कर
अब यहाँ चाँद का निकलना नहीं होता
चांदनी नहीं होती अब इस शहर में
अब किसी शक्स का रात को घर से निकलना नहीं होता
फूल तो खिलते हैं हर रोज़ इस शहर में
पर उनकी खुशबुओं से अब यह शहर नहीं महकता
पंछी निकलते हैं हर रोज़ अपने घोसलों से
पर उनकी चहचहाहट से अब यह शहर नहीं चहकता
रात भर रोता है शहर , तेरी याद में
हर सुबह ही हवा में मैंने नमी को देखा है
ऐ मेरे दोस्त तुम क्या गए मुझे छोड़कर
मैंने इन आखों को पहली बार किसी का इंतज़ार करते देखा है 

Friday, November 30, 2012

याद


तुम तो मेरे पास नहीं हो फिर
कौन है जो मेरे दिल में
बिना दस्तक दिए चुप चाप चला आ रहा है
पूछा तो खुद को तेरी याद बता रहा है

हालात

बहुर गिरे हैं मेरे आंसू ऐसे-ही-तनहा 
पर हम किसी के गले लग कर न रोए |
तरस आता है उनको मेरे हालात  पर 
लोग कहते है छुप छुप के वो बहुत हैं रोए

धुँआ

आज चांदनी रात में 
हर तरफ धुँआ धुँआ है 
न जाने कितने आशिको के दिल जल रहे है
मुझे चाँद के साथ देखकर

Monday, July 16, 2012

मोहब्बत-ए-आशिक


तुम क्या गए हमको छोडकर
जीना मुहाल हो गया
दर्द –ए – दिल की दवा बनकर
लोगो की नसीहत आने  लगी
क्या पाया तुने मोहब्बत-ए-आशिक बनकर 
आपको हमसे शिकायत है 
की दर्द -ए-मोहब्बत हम नहीं जानते 
रूठने पर आपके हम 
मनाना नहीं जानते

संवर  जाएगी जिंदगी 
सिर्फ जिस्म के जिस्म से मिलने से 
यह जरूरी तो नहीं

फिर आँखों में मोहब्बत की नमी होगी 
बीते हुए मीठे लम्हों को 
तिनका तिनका करके जोडिए तो सही

फिर वही प्यार होगा .
फिर वही अहसास होगा 
एक रोज़ फिर तन्हाई  में
आँखों में आँखें  डाल कर तो देखिये 

नाराज़गी भरी आंधियां तो हर रोज़ आएँगी
मोहब्बत को परखने के लिए 
तनहा न समझना  कभी खुद को 
आंधियां खुद ब खुद लोट जाएँगी 
रूह के कांपने  से पहले 

Wednesday, June 27, 2012

क्या दीवारों को कभी चीखते हुए देखा है
खामोश  होकर बंद कमरे में बैठ कर तो देखिये

क्या रास्तो तो कभी चलते हुए देखा है
किसी की तलाश में घर से निकल कर तो देखिये

क्या अँधेरे को कभी डरते हुए देखा है
एक चिंगारी जला कर तो देखिये

क्या उदासी को कभी सहमते हुए देखा है
होंठो पर तबस्सुम ला कर तो देखिये

क्या खामोश निगाहों में सैलाब आते हुए देखा है
बिछड़े हुए को कभी मिला कर तो देखिये