आँखों में आयी नििदया रानी
लेके सपनो का एक बगीचा
बगीचे बैठी हुई है परियों की रानी
बनाकर चंदा का पालना, सुलाया मेरे बेटे को
बनाकर तारों की डोरी ,झुलाया है मेरे बेटे को
रोने लगा तो चांदनी के आँचल से ढककर
दूध पिलाया परियों के रानी ने
आँखों में आयी नििदया रानी
सो जा मेरे बेटे सो जा मेरे बेटे
Monday, March 26, 2012
Friday, December 2, 2011
अहसास
Thursday, March 17, 2011
फूटपाथ
किसी और का गुस्सा उत्तरते देखा हैं
फूटपाथ पर उस गरीब को पिटते देखा है
सिसकियों में दर्द को छुपाते देखा है
फूटपाथ पर रोते उस गरीब को देखा है
पेट के लिए बचपन खोते देखा है
फूटपाथ पर सोते नन्ने हाथों की लकीरों को िमटते देखा है
बूढे माँ बाप के लिए खुद को बेचते देखा है
फूटपाथ पर लड़की की अस्मत को लूटते देखा है
कब तक यह सिलसिला चलेगा किसने देखा है
फूटपाथ पर हर चुनाब पर नेताओं को आश्वासन देते देखा है
फूटपाथ पर उस गरीब को पिटते देखा है
सिसकियों में दर्द को छुपाते देखा है
फूटपाथ पर रोते उस गरीब को देखा है
पेट के लिए बचपन खोते देखा है
फूटपाथ पर सोते नन्ने हाथों की लकीरों को िमटते देखा है
बूढे माँ बाप के लिए खुद को बेचते देखा है
फूटपाथ पर लड़की की अस्मत को लूटते देखा है
कब तक यह सिलसिला चलेगा किसने देखा है
फूटपाथ पर हर चुनाब पर नेताओं को आश्वासन देते देखा है
Wednesday, March 9, 2011
देखी है लोगो में तेरे हुस्न की तलब

देखी है लोगो में तेरे हुस्न की तलब
शहर में आते ही रुख, तेरी गली की तरफ होगा
डरता हूँ होश आने पर क्या होगा
तेरे शहर का वीरान मैकदा चहक रहा होगा
हर कोई साकी से कह रहा होगा
कितनी रहम दिल है तू जरूर तेरे सीने में कभी दर्द रहा होगा
तू ही बता मेरे मर्ज़ का इलाज़ क्या होगा
क्योंकि सुबह होते ही फिर रुख उसकी गली की तरफ होगा
हर शाम जख्म लेके तेरे पास लौटते हैं
लेकिन कब तक तेरे आँचल में सर रख कर रोना होगा
भूल जा अंजान साकी का रहम ,उस गली का भ्रम
तोड़ दे ये सीलसीला हर जख्म,दर्द को वक्त से भरना होगा
Tuesday, March 8, 2011
देख के आज मुझको शहर में
देख के आज मुझको शहर में
तेरे पैर के निचे से खिसकी जमीं सी क्यों है
नहीं रोते हो होके मुझसे जुदा
फिर तेरे शहर कि हवा मे नमी सी क्यों है
कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
बरसो बाद भी यहाँ यादें थमी सी क्यों हैं
हर याद को समेट के फिर ले जाऊंगा
न जाने बरसो बाद भी दिल को तेरी कमी सी क्यों है
तेरे पैर के निचे से खिसकी जमीं सी क्यों है
नहीं रोते हो होके मुझसे जुदा
फिर तेरे शहर कि हवा मे नमी सी क्यों है
कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
बरसो बाद भी यहाँ यादें थमी सी क्यों हैं
हर याद को समेट के फिर ले जाऊंगा
न जाने बरसो बाद भी दिल को तेरी कमी सी क्यों है
Wednesday, February 23, 2011
याद
याद
यादों से तेरी कैसे लडेंगे
तुम ही कहो दूर तुम से कैसे रहेंगे
बंद आँखों से भी तुझे ही देखू
खोलू जो आँखें, न पा के तुझको
लोगो से पूछू
अभी अभी यहाँ महबूब था मेरा
मुझको बता दो कहा चला गया
बहुत सताती है यादें तेरी
यादो से कहता हूँ तुम हो बस मेरी
दिल कहता है यादो से इतना न मुझको सताओ
महबूब के साथ बीताया हर लम्हा मेरा वापस ले आओ
कितना तडपता हूँ कुछ तो तरस खाओ
मुझको जल्दी महबूब से मिलाओ .
यादों से तेरी कैसे लडेंगे
तुम ही कहो दूर तुम से कैसे रहेंगे
बंद आँखों से भी तुझे ही देखू
खोलू जो आँखें, न पा के तुझको
लोगो से पूछू
अभी अभी यहाँ महबूब था मेरा
मुझको बता दो कहा चला गया
बहुत सताती है यादें तेरी
यादो से कहता हूँ तुम हो बस मेरी
दिल कहता है यादो से इतना न मुझको सताओ
महबूब के साथ बीताया हर लम्हा मेरा वापस ले आओ
कितना तडपता हूँ कुछ तो तरस खाओ
मुझको जल्दी महबूब से मिलाओ .
Friday, January 7, 2011
शिकायत
Thursday, December 9, 2010
शायरी
Thursday, August 26, 2010
इलज़ाम
Tuesday, June 29, 2010

जुल्को का अँधेरा करके
आँखों से मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
आँखों से ऐसे झलके
मेरे होठों पे आ टपके
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
होठों को साकी बन जाने दे
आँखों का प्याला बह जाने दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
तेरे हाथ जोड़ता हूँ में
तेरे पाओ पकड़ता हूँ में
दिल में जो दर्द उठा है
उससे छुटकारा दिला दे
इतनी तू मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
चिंगारी उठा दे सीने में
तेरा नाम रहे बस जिन्दा
बाकी सब कुछ जला दे
पर जुल्को का अँधेरा करके
आँखों से मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
काँधे पे सर रखकर रोने दे
सारी रात तू मुझको पीने दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे
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