Wednesday, February 23, 2011

याद

याद
यादों से तेरी कैसे लडेंगे
तुम ही कहो दूर तुम से कैसे रहेंगे
बंद आँखों से भी तुझे ही देखू
खोलू जो आँखें, न पा के तुझको
लोगो से पूछू
अभी अभी यहाँ महबूब था मेरा
मुझको बता दो कहा चला गया
बहुत सताती है यादें तेरी
यादो से कहता हूँ तुम हो बस मेरी
दिल कहता है यादो से इतना न मुझको सताओ
महबूब के साथ बीताया हर लम्हा मेरा वापस ले आओ
कितना तडपता हूँ कुछ तो तरस खाओ
मुझको जल्दी महबूब से मिलाओ .

Friday, January 7, 2011

शिकायत


गम है कोई तो मुझसे आकर शिकवा तो कर
य़ू छुप के आँशु तो न वहा

चुभ रहा क्या दिल में मुझसे आकर मश्बरा तो कर
य़ू चुप रह कर तो न सता

बहा रही हो क्यों आँशु मुझसे आकर दिल की बात तो कर
यू बंद पलकों के पीछे दर्द तो न छुपा

मेरी हर खता के लिए मुझसे आकर झगड़ा तो कर
य़ू पास रहकर दूरी का अहसास तो न करा

Thursday, December 9, 2010

शायरी


1.बस तेरी याद में लिख लेता हूँ
सोच कर यही कही तू तनहा तो नहीं



2.अभी अभी पैगाम आया है उनके आने का
ए-दिल अब तू बहाना न बना उनसे नज़रें चुराने का

Thursday, August 26, 2010

इलज़ाम


यूं इलज़ाम न लगाओ मेरे दामन पर
की हम गैरों की जुल्फों में सोते हैं

सारी रात भीगा हूँ अश्को की बारिश में
हम वो नहीं जो महफ़िल में आके चिल्लाते हैं

क्यों मेरे इश्क का ऐसे इम्तिहां लेती हो
देखे के हमको आँखों पे हाथ रख लेती हो

दरीचों के पीछे से ही सही देख तो मुझको
मेरी आँखों में आज भी तेरे सपने सजते हैं

Tuesday, June 29, 2010


जुल्को का अँधेरा करके
आँखों से मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

आँखों से ऐसे झलके
मेरे होठों पे आ टपके
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

होठों को साकी बन जाने दे
आँखों का प्याला बह जाने दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

तेरे हाथ जोड़ता हूँ में
तेरे पाओ पकड़ता हूँ में
दिल में जो दर्द उठा है
उससे छुटकारा दिला दे
इतनी तू मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

चिंगारी उठा दे सीने में
तेरा नाम रहे बस जिन्दा
बाकी सब कुछ जला दे
पर जुल्को का अँधेरा करके
आँखों से मुझको पिला दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

काँधे पे सर रखकर रोने दे
सारी रात तू मुझको पीने दे
मुझे तू शराबी बना दे
मुझे तू शराबी बना दे

Monday, June 14, 2010

निगाहें


खामोश निगाहें आज चुप्पी तोड़ ही बैठी
न जाने किस की याद में दरिया बहा बैठी

सुनकर कदमो की आहट उमड़ा ऐसा सैलाब
बेचैन निगाहें चेहरे का नकाब उड़ा बैठी

रात को निगाहें चाँद को देखने का गुनाह कर बैठी
कभी तो पास आयेगा इस इंतज़ार में नींदे गंवा बैठी

पलके झुका लेती हैं देखकर तुमको निगाहें
न जाने कब इजहारे मोहब्बत कर बैठी

खामोश निगाहें आज चुप्पी तोड़ ही बैठी
न जाने किस की याद में दरिया बहा बैठी

Sunday, June 13, 2010

तिनका


हर रोज गुजरता हूँ हसीनो की गली से
मेरी नज़र तेरे दर पर ही क्यों ठहर जाती है

एक रोज़ भी न सोचू जो तेरे बारे में
मेरी आंख क्यों भर आती है

अश्क बिखरते हैं जो ज़मी पर
तेरी तस्वीर ही क्यों नज़र आती हैं

जब भी तुम याद आते हो
मेरी तन्हाई न जाने क्यों रो जाती है

हाथों से छुपा लेते हैं चेहरा
आंख में तिनका होगा ये बात अब कही नहीं जाती

Monday, June 7, 2010

करीब


न जाने वो मेरे करीब कैसे आ गए
एक क्षण भी न लगा उनको दिल में समाने में

और भी तो थे ज़माने में
फिर मुझे ही क्यों खिंच लाये मैखाने में

इतना पिलाया हैं उन्होंने होठों से
की जाम झलकने लगा है इन आँखों से

खूबसूरत हो गया है मेरा हर एक पल
शायद इसलिए मज़ा आता है साकी तुझको पिलाने में

मोहब्बत ही बसी है हर जर्रे जर्रे में
दर्द ही पाया है हर बार उसे जलाने में

जिन झपकियों से दूर था तू "अंजान"
आज वही काम आ रही हैं तुझे सपने दिखाने में

Thursday, May 27, 2010

नाराजगी

नाराजगी

आज मैं जो उनसे नाराज़ हुआ
तो दिल उनकी अच्छाईया बताने लगा

जिस पल भी मैंने तुझे याद किया
तो दिल गिन गिन के मुझे बताने लगा

आंख बंद करके जो रोया
तो दिल तेरे ही सपने दिखाने लगा

तन्हाई में जो तुझको महसूस किया
तो दिल तुझसे मेरा रिश्ता बताने लगा

Tuesday, May 11, 2010

छुप छुप के


तेरे यादों से में दिल लगाता हूँ
आज कल में धीमे धीमे मुस्कराता हूँ

दुनिया वालों से में यह राज़ छुपाता हूँ
आज कल में छुप छुप के मुस्कराता हूँ

तू जो मिल जाए कही
मैं नज़रें चुराता हूँ

दुनिया वालो से में यह राज़ छुपाता हूँ
आज कल मैं छुप छुप के शर्माता हूँ

सोचता हूँ तेरे बारे में
लब्जो में हर बात सजा लेता हूँ

दुनिया वालों से यह राज़ छुपता हूँ
आज कल मैं छुप छुप के गुनगुनाता हूँ


जिक्र तेरा छिड जाए तो
मैं महफ़िल छोड़ जाता हूँ

दुनिया वालो से में यह राज़ छुपाता हूँ
आज कल मैं छुप छुप के रोता हूँ


तेरे यादों से में दिल लगाता हूँ
आज कल में धीमे धीमे मुस्कराता हूँ