Monday, January 5, 2015

मैं खुशनसीब हूँ कितना यह पता तो नहीं

मैं खुशनसीब हूँ कितना यह पता तो नहीं
पर तेरा ख्याल आने से ही मुस्करा लेता हूँ
ये भी कुछ कम तो नहीं


बात है कुछ  सुनी सुनी सी
की वो भी अनजान नहीं मेरी मोहबत से
खुश हूँ  मैं  अब , पराया  नहीं तेरे लिए
ये भी कुछ कम तो नहीं


मैं खुशनसीब हूँ कितना यह पता तो नहीं

साँसे

जिस्म में मेरे  कहीं तो तेरी साँसे चलती है
वरना किसी की यादो में  दम नहीं की हमको  रुला सके 

Thursday, August 21, 2014

हिसाब

मांगती है साक़ी जब हिसाब पिलाने का
सोचते है नहीं कोई फायदा होश गबाने का

Tuesday, August 19, 2014

उतार दो ये बस्त्र जो तुम्हारे मैले हैं

मन तो करुणा का प्याला है 
फिर क्यों अहम पाला है 

उतार दो ये बस्त्र
जो तुम्हारे मैले हैं

जब से असत्य अपनाया है
सोचो कितने कष्ट तुमने झेले हैं

उतार दो ये बस्त्र
जो तुम्हारे मैले हैं

क्रोध में तू क्या क्या उगल गया
प्रेम को न जाने क्यों निगल गया

उतार दो ये बस्त्र
जो तुम्हारे मैले हैं

Thursday, January 30, 2014

क्या लिखूं मैं

और क्या लिखूं मैं तेरे बिछड़ने पर 
बस ये एक दिल है जो मुझसे अब संभलता नहीं

जुदाई

हर वक़्त दिल को यकीं दिलाता रहता हूँ कि तुम मेरे पास हो 
नादां है दिल एक पल कि जुदाई सह  पाता नहीं

तुम दूर हो

हॅसता रहता हूँ तन्हाई में भी 
दिल को कहीं पता न चल जाये कि तुम दूर हो

Wednesday, November 6, 2013

आँखों में पानी अब ठहरता नहीं

कितना छुपाऊ  दर्द को
आँखों में पानी अब ठहरता नहीं

साँसों कि दिल को खबर  नहीं
 तुझे  भूलकर भी अब जीवन संबरता नहीं

मन से निकाल भी दूं तुझ को
पर यादों का सफ़र कभी गुज़रता नहीं

क्यों कर बैठा तू मोहब्बत अंजान
पता था इसमें डूबने वाला कभी उभरता नहीं

                                                   -अंजान

मोहब्बत क्या है


तेरी बाँहों में जब सिमट रही थी
तब जाना मोहब्बत क्या है
शर्म से जब मिट रही थी
तब जाना निगाहों का जादू क्या है
खुशियां जब समेट रही थी
तब जाना आँचल का गीला होना क्या है
चूमा था जब हथेलियों को
तब जाना प्यार कि संजीदगी क्या है

Saturday, September 21, 2013

इलज़ाम

मेरी मोहब्बत पर वो यू इलज़ाम लगा गए 
कि मेरी होठो पर और भी नाम है उनके नाम के सिवा दबे दबे से