Wednesday, January 18, 2017

हिम्मत

पक्षियों से कह दो उड़ना छोड़ दो
हिम्मत है तो उनका हौसला तोड़ दो
लोग कहते है उम्मीद छोड़ दो
हिम्मत है तो सबका भरोसा तोड़ दो
आरक्षण की जंजीर पकड़ना छोड़ दो
हिम्मत है तो तुम जातपात तोड़ दो
खुले आसमान के नीचे जीना छोड़ दो
हिम्मत है तो अपना आशियाना तोड़ दो
-अंजान

Friday, January 6, 2017

जिंदगी

उलझा हुआ हूँ
ए जिंदगी
तुझे सुलझाने में
लोग कहते हैं
उम्र बीत जाती है
तुझे समझने में
कौन अपना कौन पराया
कौन दोस्त कौन दुश्मन
ये कैसी पहेली है
दूर से देखो जैसे रंगोली है
पास से देखो सबकी चादर मैली है
समझ जाऊंगा तुझे उम्र के
किसी पड़ाब पर
अभी मैने हार कहाँ मानी है
उलझा हुआ हूँ
ए जिंदगी
तुझे सुलझाने में
लोग कहते हैं
उम्र बीत जाती है
तुझे समझने में
जहर पिलाने वाले भी हैं बहुत तुझे
मोहब्बत से तू पिघल जाती है
ये बात क्यों भूल जाती है
समझ जाऊंगा तुझे उम्र के
किसी पड़ाब पर
अभी मैने हार कहाँ मानी है
-अंजान

आश


बांह फैलाये खड़ा हूँ
जैसी ही मिलेगी मोहब्बत
उसे भींच लूंगा
पल भर में उसे अपने अंदर
खींच लूंगा...

Monday, October 3, 2016

पतझर

 पतझर में नंगे हो गए थे जो पेड़
सूख कर गिर गए बारिश के इंतज़ार में

शमायें

ना जाने कितनी शमायें जल उठी 
परवाने देखकर
इन्हे भी तड़पा तड़पा कर
जान लेने में मज़ा आता है

Friday, September 2, 2016

आवाज़

मोहब्बत तो खामोशियों से भरी होती है
आवाज़ तो उसमें बस दिल टूटने की होती है

Thursday, September 1, 2016

गुफ्तगू

फिर तन्हाइयों में जीना चाहता हूँ,
ऐ जिंदगी तेरा क्या इरादा है।
आ गुफ्तगू कर ले,
इन खामोश दीवारों से किनारा कर ले।
मोहब्बत में क्या क्या कर गुजरे,
उनका हिसाब कर ले,
कितना तनहा रोया,कितना उनके आँचल में।
आ खुले आसमां के नीचे,
मोहब्बत और तन्हाई को साथ ले चले।
किसका पल्ला भारी है ,
पूछेंगे उनसे बारी बारी

Wednesday, March 11, 2015

बड़े लोग

दरियाओं को देखा है बनते खारा, समुन्दर में मिलकर
डर लगता है बड़े लोगो के शहर में आकर

इंतज़ार

हर रोज़ खिड़की पर आकर 
न जाने क्या ख्वाब बुन रही थी आँखें 
किसी में इंतज़ार में 
अरसा बीत गया पत्थर हो गयी आँखें
उसके इंतज़ार में 
घर के सामने वाली सड़क भी बिखर गयी
एक मुसाफिर के इंतज़ार में

दर्द

हंसा हंसा के तुमने तो बुरा हाल कर दिया 
सच बताओ, कितने छुपा रखे हैं दामन में दर्द भरे किस्से