Thursday, June 6, 2013

संबेदना

माँ नहीं तो माँ के प्यार को रोता है
रक्षाबंदन पर बहिन के प्यार को तरसता है
इतनी अनमोल  हूँ अगर मैं
फिर क्यों मुझे जन्म लेने से रोकते हो
मुझे भी इस दुनिया मै कदम रख लेने दो

मुझको भी उड़ान भर लेने दो
कुछ दूर उड़ लेने दो
दो कदम मुझे भी बढ लेने दो
मुझे भी पढ लेने दो

कब तक भीड़ मै सहारा देखूंगी
मुझे भी आत्मनिर्भर बन लेने दो
मैं खुद को संभल सकती हूँ
एक बार मुझे घर से बहार निकलने दो

                             -अंजान

Monday, March 11, 2013

आरज़ू है तुझसे

ये हुस्न ,ये इश्क ,ये जिस्म 
तेरा दिल नसीं है 
पर मल्लिका -ए -मोहब्बत 
ये शहर तेरे लायक नहीं 

राह-ए -इश्क जो तूने दिखा दिया 
सोचने वालों की कमी नहीं 
कहीं तू तवायफ तो नहीं 

जनता हूँ छूते ही बिखर जाएगी तू 
मसीहा बनकर निकलेगा कोई घर से
ऐसी इस शहर के लोगो से उम्मीद तो नहीं
पर सहानुभूति दिखाने
हर कोई जुलूस निकालेगा सड़को पर
तेरे बिखरने ने के बाद

आरज़ू है तुझसे
चेहरे से नकाब न उठाना
गिद्ध जैसी नज़रों वाले
लोगो की इस शहर में कमीं नहीं
कहीं तू उनका शिकार तो नहीं

Tuesday, February 19, 2013

बात मिलने की थी ,इतनी बढ जाएगी मुझको खबर न थी


तुमसे एक बार मिलने की चाहत थी
 मुझको खबर न थी
तुमसे  मिलकर मेरी रातों की नींद उड़ जाएगी
बात मिलने की थी ,इतनी बढ जाएगी
 मुझको खबर न थी

जब मेरे नैनो ने , तेरे नैनो में झाँका था
तब तेरे नैनो ने भी मेरे नैनो में झाँका था
मुझको खबर न थी

 चाहे  तूने कुछ न  कहा था
पर तेरे दिल की  हर बात अक्षर अक्षर बन कर
मेरे जहन में उतर रही थी
मुझको खबर न थी

एक बिजली  सी कड़की थी
और तुम डर  से
तुम मेरी बाँहों में सिमट रही थी
मुझको खबर न थी

मेरी हर सांस में नाम भी तेरा है
धडकनों में अहसास भी तेरा है
मुझको खबर न थी

बात मिलने की थी अंजान ,इतनी बढ जाएगी
 मुझको खबर न थी
                -अंजान

Sunday, February 17, 2013

प्यार का जवाब

चलो मैंने कसम खा ली तेरे प्यार की
अब ला तारे आसमान से तोड़ के

अगर मेरा चेहरा चाँद में नज़र आता है
फिर क्यों मेरे घर रोज़ चला आता है

कसमे पूरी नहीं कर पाया तो मैं बेवफा हो गयी
क्यूँ नहीं किया था प्यार तूने संभल के

बहुत शराब पी ली तूने मेरी आँखों से
चल जा अब पैसे खर्च कर मैखाने में

और अगर मैं रहती हूँ हर वक़्त तेरे ख्वाओं में
तो क्या करेगा पाकर मुझे हकीकत में

Wednesday, January 30, 2013

मोहब्बत

सोचा न  जिनको ना जाने कैसे ख्यालो में  आ गए  
दूर से देखा था बस न जाने कैसे उनके  इतने करीब  आ गया 

तेरी ही तलाश में रहती हैं हर वक्त आँखें 
न जाने इन कदमो का रुख कब तेरी गली की तरफ हो गया 

सुना था अभी तक मोहब्बत काला  जादू करती है 
एक धुआं सा उठा और मैं मोहब्बत की गिरफ्त में आ गया 

अभी तक तनहा था , पर जिंदगी में गम न था अंजान 
फिर यह अचानक दिल में दर्द कहाँ से आ गया 

Monday, December 3, 2012

याद

बहुत याद करता हूँ मै तुमको कैसे कहूं
डर लगता है कही तुम रो न पड़ो

तुम क्या गए शहर छोड़कर


तुम क्या गए  शहर छोड़कर
अब यहाँ चाँद का निकलना नहीं होता
चांदनी नहीं होती अब इस शहर में
अब किसी शक्स का रात को घर से निकलना नहीं होता
फूल तो खिलते हैं हर रोज़ इस शहर में
पर उनकी खुशबुओं से अब यह शहर नहीं महकता
पंछी निकलते हैं हर रोज़ अपने घोसलों से
पर उनकी चहचहाहट से अब यह शहर नहीं चहकता
रात भर रोता है शहर , तेरी याद में
हर सुबह ही हवा में मैंने नमी को देखा है
ऐ मेरे दोस्त तुम क्या गए मुझे छोड़कर
मैंने इन आखों को पहली बार किसी का इंतज़ार करते देखा है 

Friday, November 30, 2012

याद


तुम तो मेरे पास नहीं हो फिर
कौन है जो मेरे दिल में
बिना दस्तक दिए चुप चाप चला आ रहा है
पूछा तो खुद को तेरी याद बता रहा है

हालात

बहुर गिरे हैं मेरे आंसू ऐसे-ही-तनहा 
पर हम किसी के गले लग कर न रोए |
तरस आता है उनको मेरे हालात  पर 
लोग कहते है छुप छुप के वो बहुत हैं रोए

धुँआ

आज चांदनी रात में 
हर तरफ धुँआ धुँआ है 
न जाने कितने आशिको के दिल जल रहे है
मुझे चाँद के साथ देखकर